कैसे भुलूँ वो रात जमीं -आसमाँ मिल रहे थे जिस रात । उफ़्फ़ कैसे भूला दूँ वो रात, हुस्न था कैसे भुलूँ वो रात जमीं -आसमाँ मिल रहे थे जिस रात । उफ़्फ़ कैसे भूला दूँ वो रात,...
चांद सितारे देख के टूटती -बिखरती हैं! चांद सितारे देख के टूटती -बिखरती हैं!
और भूत की अपवाह फैलाता योगी और किसान को डराता कठपुतली बनके माला फेरता। और भूत की अपवाह फैलाता योगी और किसान को डराता कठपुतली बनके माला फेरता।
उनके जादू के जवाँ होने का है असर, कि ये सारा खेल रहा है पसर। उनके जादू के जवाँ होने का है असर, कि ये सारा खेल रहा है पसर।
जो बेचारा हरिराम जो बेचारा हरिराम
अब बस करो भाई रूख्सती की घड़ी बीतती जाई। अब बस करो भाई रूख्सती की घड़ी बीतती जाई।